Dholavira history | धोलावीरा का इतिहास

हेलो दोस्तों में यहा Dholavira history- धोलावीरा का इतिहास और उनसे जुडी कुछ बाते विस्तार से बताना चाहता हु की धोलावीरा इतना प्रख्यात क्यों और कैसे हुवा .

Dholavira history | धोलावीरा का इतिहास

 

Dholavira history in hindi

अरब सागर के किनारे बसा कच्छ में खदेड़ नामका टापू हे धोलावीरा उसे स्वेत रण भी खा जाता हे ये प्राचीन भारत इतिहास का सबसे महत्व पूण स्थनो में से एक हे लुनी नदी के टत पर स्थित ऐ स्थान हे धोलावीरा का जो अपने ज़माने दुनिया के सबसे महान शहरो में से एक हुवा करता था .धोलावीरा का दूसरा नाम कोटड़ा टिम्बा भी कहा जाता हे

हड़प्पा सिंधुघाटी सभ्यता

धोलावीरा उसी हड़प्पा सिंधुघाटी सभ्यता का हिस्शा था जो 5000 साल पहले फली फूली थी प्राचीन रोमन सभ्यता के आने से पहले पहले हड़प्पा वासी एक शानदार नगर बसा सुके थे। सन 1990 में पुरातनतत्व वेदो ने यहां खुदाई शरू की और धोलावीरा की खोज हुई। 5000 साल पहले का ऐ शहर के आस पास का नजारा एक दम अलग था। आज अहा सुनसान हे वहा उस जमानेमे जहाजों की बड़ी चहल पहल से भरा एक व्यस्त बंदर गाह हुवा करता था। उन दिनों में धोलावीरा पच्छिम में मीसा पोटामिया सभ्यता में जाकर व्यापर किया करता था उनदिनों समुद्रो मार्ग से बड़ी आवा जाहि होती थी।

–Dholavira… मोतिमन उत्पादन का बड़ा केंद्र था। उस जमाने में ऐ विशाल रण एक एह अहम समुद्र मार्ग हुवा करता था। पुरातात्विक नतीजों केआधार पर ऐ मॉडल बताता हे की धोलावीरा कुछ ऐसा होता होगा -लगभग 5000 वर्ष पहले यहां पश्चिम एशिया के जहाज हड़प्पा वालो के साथ व्यापार करने आया करते थे। तट के आस पास हर तरह से सुरक्षित था धोलावीरा। और इस भव्य नगर के बीचो बिच एक शानदार गड़ी थी। ….

जल जोहन प्रणाली ….

5000 साल बाद ऐ दीवारे खंडर ही सही फिर भी यहां खड़ी हे देख कर ही समझ आ जाता हे की प्राचीन धोलावीरा के नगर योजना करो ने यहां एक ऐसी जल जोहन प्रणाली बनाई थी.जो इक्सवी सदी के कई शहरो से बहेतर थी। खुदाई में यहां आपस में जुडी होजो की समूची प्रणाली मिली हे यहां शहर में सबसे ऊंची जगह मनहर नदी में बांध बांधा गया था। नदी के जरिये ये होजो में पानी भरा करते थे।

1990 के पुरे दसक में पुरातत्व वेदो ने यहां खुदाई करके इस भव्य नगर के रहस्यों को उजागर किया। -इनमे सबसे दिलजस्प थे वो सिन्ह जो उसी दीवार में अंदर वाले कक्ष में मिले थे उस कक्ष में काम करते हुवे पहले सिन्ह का एक हीस्सा था और पूरा हीस्सा परत दर परत उतर ने के बाद मिला उसमे पुरातन विभाग को तीन महीने का समय लग गया। गड़ी के लम्बे चौड़े उत्तरी दरवाजे के ऊपर मौजूद विश्व का सबसे पुराना साइन बोर्ड मिला लेकिन जब तक हड़प्पाई लिपि पढ़ी नहीं जाती तबतक साइन बोर्ड पर क्या लिखा हे वो राज राज ही रहेगा। ……..हड़प्पा से जुडी दूसरी मुख्य जगहों में हड़प्पा ,मोहनजोदड़ो ,गनेरीवाला ,राखीगढ़ी ,कालीबंगन ,रूपनगर और लोथल शमिल हे 

  1. धोलावीरा कितना पुराना है> हड़प्पा सभ्यता का एक शहर ,ईशा -पूर्व 3000 से लेकर ईशा -पूर्व 2000 के बिच की एक शहरी बस्ती हे जिसकी गणना दक्षिण एशिया की कुछ ही भली भाती परीक्षित की गई शहरी बस्तीयो में की जाती हे
  2. धोलावीरा की खुदाई किसने शरू की थी ? >उत्खलन . ऐ एस आई द्वारा 1989 में बीस्ट के निर्देशन में शरू किया था और 1990 से 2005 के बिच 13 क्षेत्र उत्खलन हुवे थे।

हाल ही में धोलावीरा क्यों समाचारो में आया ? हाल ही में इसे युनेस्को विश्व ,विरासत अंकितक प्राप्त हुवा हे, हाल ही में UNESCO ने गुजरात के धोलावीरा शहर को भारत के 40 वे विश्व धरोहर स्थल के रूप में धोषित किया हे। यह प्रतिष्ठित सूचि में शामिल होने वाली भारत में सिंधु घाटी सभ्यता { IVC }

best doctor in india

Leave a Comment

Kuwait City Ki Lifestyle Fashion jewelry most expensive water in the world junk food in hindi Nayi Shiksha Niti