मंदिर टुटा देश का पतन

मंदिर टुटा देश का पतन जिस देश ने मंदिर को तोडा उसका पतन निश्चित हे इसके बारे में थो विस्तार से ये लेख लिखने की कोशिस की हे सभी सभ्यताओ का एक ही उतर काशी विश्वनाथ

मंदिर टुटा देश का पतन

किस किस देश का पतन हुवा

मिस्र के फराओ मंदिर एक बार टूटे फिर कभी न सके और मिस्र समाप्त हो गया। फारस के अग्नि मंदिर एक बार टूटे फिर वहा कभीअग्नि के आराधना नहीं हुयी। फारस समाप्त हो गया। यूनान में एक बार उनके देवता ओ को शैतान बताकर उनके मंदिरो को ध्वस्त किया गया उसके बाद फिर कभी ग्रीस खड़ा नहीं हुवा। अब कोई ज्यूस आ या अपोलो को नहीं पूजता ओलम्पिक पर्वत पर अवस्थित उनके द्रदास द्रादश देवो का कोई नामलेवा नहीं प्राचीन रोमन धर्म के मंदिर एक बार खंडित हुवे फिर कभी न बन सके। रोम समाप्त हो गया जुपिटर के अनुयाई समाप्त होगये। पिसोपोटामिया की सभ्यता पर एक बार सिकंदर काआक्रमण हुवा ओर एक जटके में वह सभ्यता समाप्त हो गई उनके देवता ओका अब किसीको नाम तक याद नहीं

काशी पर आक्रमण

अब आप यूनानी सभ्यता के बारह देवो की समानता भारत में ढूंढ प् रहे हो तो आइये काशी सलते है संसार की समस्त सभ्यताओं पर हुए सरे बर्बर आक्रमणों को एक में मिला दे तब भी उनसे अधिक आक्रमण महादेव की काशी पर हवे हे इस पर सावन में निहारिये काशी को !भारत के उस सबसे प्राचीन नगर के वैभव को और महादेव का जलाभिषेक करने के लिए जुटती भक्तो की विशाल भीड़ को हर्षतिरेक से फहरा उठे आपके रोम रोम चिल्लाये -हर हर महादेव !संसार के सरे असभ्य मिल कर भी सभ्यता का नाश नहीं कर पाते !धर्म कभी भी समाप्त नहीं होता हम कभी भी समाप्त नहीं हो सकते। ……

सभ्यता धर्मकाज के लिए कब किसका चयन करेगी यह कोई नहीं जानता। काशी कैसे अपने भक्तोंको बुला कर उनके पाप धोती हे इसका अद्भुत उदाहरण देखिये। जब मोहमद घोरी और ऐबक ने काशी का विध्वंस किया ,तब जानते हे वह के मंदिरो और घाटों का पुनः निर्माण किसने कराया? कन्नौज नरेश जयचंद के पुत्र राजा हरिचन्द्र ने !और वह भी तब जब चंदावर के युद्ध में वे घोरी की सेना से पराजित हो गए थे और सिकंदर लोदी के समय हुए ध्वंस को ठीक कराया अकबर के दरबारमे रहनेवाले राजा मानसिह और राजा टोडरमल ने … राजनिक कारणो से लोग भले हजार टुकड़ो में टूट जाये ,महादेव के शरण में आकर सभी एक हो जाते हे। क्या ब्राह्मण, क्या ठाकुर, कए यादव,क्या गुर्जर ,क्या वैस्य ……क्या भाजपा ,क्या कांग्रेस ,क्या सपा क्या राजद ….राजनीती तोड़ती हे पर धर्म जोड़ता हे……..

काशी विश्वनाथ मंदिर

काशी विश्वनाथ मंदिर को ओरंगजेब ने तुड़वाया तो एक दीवाल छोड़ दी उसने। यह इसीलिए ,की काशी आने वाले लोग देख ले की हम उनके देवस्थलों का सवरूप जब चाहे तब बदल सकतेहै,और वे कुछ नहीं कर सकते। सुन कर बुरा लगा न ?पर ऐसी बुराई का उतर सभ्यता कैसे देती हे ,यह देखिये। उस घटना के लगभग सौ वर्ष बाद जब राजमाता अहिल्या बाई होल्कर जी ने मंदिर का निर्माण किया तो उअसके कुछ दिनोबाद ही महाराजा रणजीत सिंह जी ने मंदिर के दोनों शिखरों को सोने से मढ़वा दिया।

दिल्ली में बैठे मुगलो के आखो के सामने मंदिर पर बाईस मन सोना चढ़ा कर कहा,की देख लुटेरों की सेंधमारी से सभ्यता का वैभव समाप्त नहीं होता। तोड़ ने वाले समाप्त हो जाते हे रचने वाले समाप्त नहीं होत ….. महादेव की काशी जाइये तो संसार की उस प्राचीनतम नगरी को इस भाव से भी देखिए की शिव के त्रिशूल पर बसी यह कभी समाप्त न होने वाली नगरी हे। विध्वंस से सभ्यता समाप्त नहीं होती ,धर्म कभी समाप्त नहीं होता। महादेव अपने भक्तो को कभी अकेला नहीं छोड़ते। …….. हर हर महादेव। ….

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