भारत के प्रधान मंत्री

भारत के प्रधान मंत्री  का जिवन यु तो खुलि किताब कि तरह हे उनके जिवन कि एक अन सुनि कहानि अहा पर बतांने जा रहा हु1990 की घटना…है जब दो आदमी युवान अवस्था में गांव गांव संघ का प्रचार किया करते थे चलो जानते हैं क्या हे कहानि

भारत के प्र्धान मंत्रि

 

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भारत के प्रधान मंत्री
ptime minister of india

भारत के प्रधान मंत्री  का जिवन यु तो खुलि किताब कि तरह हे उनके जिवन कि एक अन सुनि कहानि अहा पर बतांने जा रहा हु1990 की घटना…है जब दो आदमी युवान अवस्था में गांव गांव संघ का प्रचार किया करते थे चलो जानते हैं क्या हे कहानी

आसाम से दो सहेलियां रेलवे स्टेशन में भर्ती हेतु गुजरात रवाना हुई रास्ते में एक स्टेशन पर गाड़ी बदलकर आगे का सफर उन्हें तय करना था लेकिन पहले गाड़ी में कुछ लड़कों ने उनसे छेड़छाड़ की इस वजह से अगली गाड़ी में तो कम से कम सफर सुखद हो यह आशा मन में रखकर भगवान से प्रार्थना करते हुए दोनों सहेलियां रेलवे स्टेशन पर उतर गई भागते हुए रिजर्वेशन चार्ट तक वह पहुंची और चार्ट देखने लगी चार्ट देख दोनों परेशान हुए होगे और भयभीत हो गई क्योंकि उनका रिजर्वेशन कंफर्म नहीं हो पाया था मायूस और ना चाहते उन्होंने नजदीक खड़े टीसी से गाड़ी में जगह देने के लिए विनंती की टीसी ने भी गाड़ी आने पर कोशिश करने का आश्वासन दिया एक दूसरे को देते दोनों गाड़ी का इंतजार करने लगी आखिरकार गाड़ी आई गई और दोनों जैसे तैसे कर गाड़ी में एक जगह बैठ गए ..

भारत के प्रधान मंत्री

–जब सामने देखा तो क्या सामने दो पुरुष बैठे थे पिछले सफर में हुए बदसलूकी कैसे भूल जाती लेकिन अब वहां बैठने के अलावा कोई चारा भी नहीं था क्योंकि उस डिब्बे में कोई और जगह खाली भी नहीं थी गाड़ी निकल चुकी थी और दोनों की निगाहें किसी को ढूंढ रही थी शायद कोई दूसरी जगह मिल जाए कुछ समय बाद गिरदी को काटते हुए टीसी वहां पहुंच गया और कहने लगा कहीं ओर जगह नहीं और इस सीट का भी रिजर्वेशन अगले स्टेशन से हो चुका है कृपया आप अगले स्टेशन पर दूसरी जगह देख लीजिए यह सुनते ही दोनों के पैरों तले से जमीन खिसक गई क्योंकि रात का सफर जो गाया था गाड़ी तेजी से आगे बढ़ने लगी जैसे-जैसे अगला स्टेशन पास आने लगा दोनों परेशान होने लगी लेकिन सामने बैठे पुरुष उनके परेशानी के साथ भय कि अवस्था बड़े बारीकी से देख रहे थे जैसे अगला स्टेशन आया दोनों पुरुष उठ खड़े हो गए और चल दिए अब दोनों लड़कियों ने उनकी जगह पकड़ ली और गाड़ी निकल पडि कुछ क्षणों बाद वह नौजवान वापस आए और कुछ कहे बिना नीचे सो गए दोनों सहेलियां यह देख अचंभित हो गई और डर भी रही थी जिस प्रकार सुबह के सफर में हुआ उसे याद कर डरते हुए सो गई

,,परिचय,,

सुबह चाय वाले की आवाज सुन नींद खुली दोनों ने उन पुरुषों को धन्यवाद कहा तो उनमें से एक पुरुष ने कहा बहन जी गुजरात में कोई मदद चाहिए तो जरूर बताना अब दोनों सहेलिया का उनके बारे में मत बदल चुका था खुद को बिना रुके एक लड़की ने अपनी बुक निकाली और उनसे अपना नाम और संपर्क लिखने को कहा है दोनों ने अपना नाम और पता बुक में लिखा पर हमारा स्टेशन आ गया है ऐसा कह कर उतर गए और गिर्दी में कहीं गुम हो गए दोनों सहेलियां ने उस बुक में लिखे नाम पड़े वह नाम थे संघ के स्वयंसेवक नरेंद्र मोदी जी और शंकर सिह वाघेला [ . हाल के दिनों मे दोनों अलग अलग राजनीतिक दलों के नेता हे . ]उनमें से एक हमे भारत के प्रधानमंत्री रूप में मिला हे.,,

भारत के प्रधानमंत्री

 

  इस लेख की लेखिका फिलहाल General Manager of the cqentre for railwayinformation system indan railway New Delhi में कार्यरत है और यह लेख

The Hindu इस अंग्रेजी पेपर में पेज नंबर एक A train journey and two names to remember पर इस नाम से तारीख 1 jun 2014 प्रकाशित हुआ ..

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